Fixed Deposit: फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर घटी, जानिए इससे बेहतर निवेश का विकल्प

बिजनेस
Updated Sep 25, 2019 | 15:05 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें लगातार घट रही हैं।ऐसे में निवेशक इससे बेहतर रिटर्न के लिए इससे अच्छा निवेश का विकल्प ढूंड रहे हैं। एक्सपर्ट के जरिए जानिए एफडी से बेहतर निवेश का कौन सा विकल्प है।

Fixed Deposit
फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर निवेश का विकल्प।  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

फिक्स्ड डिपॉजिट, अलग-अलग आयु समूह के लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय निवेश साधनों में से एक है। गारंटीड रिटर्न का आश्वासन और फिक्स्ड रेगुलर इनकम का ऑप्शन, इसकी इतनी अधिक लोकप्रियता का मुख्य कारण है। FD पर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई फर्क नहीं पड़ता है और इसकी इसी खासियत की वजह से यह जोखिम उठाने से परहेज करने वाले निवेशकों के लिए एक पसंदीदा निवेश बना हुआ है। 

लेकिन, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लेंडिंग रेट्स में कटौती किए जाने के कारण, बैंकों ने भी फिक्स्ड डिपॉजिट के इंटरेस्ट रेट को कम कर दिया है। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का इंटरेस्ट रेट अब तक 50 से 100 बेसिस पॉइंट्स तक गिर चुका है जिससे अब इस पर 5 से 6.5 प्रतिशत का इंटरेस्ट रेट मिलने लगा है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों के रेट्स थोड़े और कम हैं। इससे निवेशक परेशान हो गए हैं और अब वे इसका अल्टरनेटिव ढूँढने में लग गए हैं। 

फिक्स्ड डिपॉजिट का अल्टरनेटिव क्या हो सकता है? 
गवर्नमेंट बॉन्ड, एक व्यवहार्य ऑप्शन (या एक अतिरिक्त निवेश ऑप्शन) हो सकता है क्योंकि यह FD से थोड़ा ज्यादा रिटर्न देता है। इसका लॉक-इन पीरियड थोड़ा लम्बा होता है और इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने का ऑप्शन मिलता है। 
तो, गवर्नमेंट बॉन्ड कैसे काम करते हैं? 

बॉन्ड्स, निवेश किए गए पैसे के बदले में फाइनेंशियल कंपनियों या सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और इसके बदले में निवेशकों को एक निश्चित अवधि तक रेगुलर या फिक्स्ड इंटरेस्ट मिलता है। आप इसकी तुलना एक लोन से कर सकते हैं जहाँ आप, एक निवेशक के रूप में, उधारदाता बन जाते हैं और अपने पैसे को एक ऐसी कंपनी में निवेश करते हैं जो बॉन्ड्स जारी करती है और उस पर मिलने वाला कूपन, उसका इंटरेस्ट होता है।

गवर्नमेंट बॉन्ड्स के बारे में जानने लायक कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • गवर्नमेंट बॉन्ड्स में 7 साल का एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है। 
  • इस पर 7.75% का इंटरेस्ट मिलता है। 
  • आप इसमें कम से कम 1,000 रु. और उसके बाद से 1,000 रु. के मल्टीपल में निवेश कर सकते हैं। 
  • इसमें निवेश करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। 
  • इंटरेस्ट पाने के लिए, आप या तो क्यूमुलेटिव या नॉन-क्यूमुलेटिव ऑप्शन का चुनाव कर सकते हैं। नॉन-क्यूमुलेटिव ऑप्शन का चुनाव करने पर आपको हर 6 महीने पर इंटरेस्ट मिलेगा जबकि क्यूमुलेटिव ऑप्शन का चुनाव करने पर इंटरेस्ट का पैसा फिर से निवेश होता जाएगा जो आपको निर्धारित समय-सीमा के अंत में एक साथ मिल जाएगा। 

गवर्नमेंट बॉन्ड, एक निवेशक के लिए एक दूसरा फिक्स्ड-इनकम चॉइस हो सकता है क्योंकि यह सरकार द्वारा समर्थित होता है, इसलिए यह अधिक सुरक्षित होता है। यदि टैक्स की दृष्टि से देखा जाय तो बैंक, FD पर TDS काटते हैं जबकि गवर्नमेंट बॉन्ड्स में ऐसा नहीं होता है। 

इसके अलावा, गवर्नमेंट बॉन्ड्स के मामले में निवेशकों को FD से लम्बा इन्वेस्टमेंट टाइम पीरियड मिलता है और इन पर बैंक FD से ज्यादा रिटर्न मिलने की सम्भावना रहती है। लेकिन, टैक्स की दृष्टि से, बॉन्ड्स पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर उसी तरह टैक्स लग सकता है जिस तरह फिक्स्ड डिपॉजिट के इंटरेस्ट पर लग सकता है। 

इसलिए, आप एक डाइवर्सिफाइड इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो बनाते समय एक दूसरे लॉन्ग-टर्म फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट (जैसे FD और PPF) के रूप में गवर्नमेंट बॉन्ड्स पर भी विचार कर सकते हैं।

(आदिल शेट्टी, सीईओ बैंक बाजार) (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं।)

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