नकली प्रोडक्ट से घरेलू अर्थव्यवस्था को 1000 अरब रुपये का चूना लगता है: रिपोर्ट

बिजनेस
Updated Nov 08, 2019 | 17:32 IST | भाषा

Fake product: नकली उत्पादों के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था को हर साल करीब एक हजार अरब रुपये यानी 14.70 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होता है।

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Fake product: नकली प्रोडक्ट्स से हो रहा अर्थव्यवस्था का नुकसान  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली:  नकली उत्पादों के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था को हर साल करीब एक हजार अरब रुपये यानी 14.70 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होता है। प्रमाणन संबंधी समाधान मुहैया कराने वाली स्वयंसेवी संस्था ‘ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशंस प्रोवाइडर एसोसिएशन (एएसपीए)’ ने उत्पादों की जालसाजी को लेकर जारी अपनी रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं में यह जानकारी दी है।

दवा हो या दारू, मिठाइयां हों या पेय पदार्थ, कपड़े-जूते हों या इलेक्ट्रिक उपकरण, हर प्रकार के उत्पादों की जालसाजी हो रही है। इस तरह के नकली उत्पादों से न सिर्फ लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि सरकारी खजाने को भी चूना लगता है। रिपोर्ट के अनुसार नकली उत्पादों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सालाना एक हजार अरब रुपये तक का नुकसान होता है।एएसपीए ने एक बयान में कहा कि वर्ष 2019 में जनवरी से अक्टूबर के दौरान उत्पादों की नकल 15 प्रतिशत बढ़ी है। राज्यवार देखें तो उत्तरप्रदेश इस तरह की जालसाजी में सबसे

ऊपर है। इसके बाद बिहार, राजस्थान, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब और गुजरात का स्थान है।एएसपीए के अनुसार, 2018 और 2019 में सबसे अधिक कारोबार नकली शराब का हुआ। इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ, दवा, एफएमसीजी, दस्तावेज, तंबाकू, वाहन, निर्माण सामग्री तथा रसायन के उत्पादों की सर्वाधिक नक्काली हुई।

नकली मुद्रा के 25 प्रतिशत मामले सिर्फ पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से रहे। शराब के मामले में 65 प्रतिशत नक्काली उत्तरप्रदेश और झारखंड में हुई। खाद्य पदार्थों में मिलावट के 50 प्रतिशत से अधिक मामले उत्तरप्रदेश, राजस्थान और पंजाब में पाये गये। नकली दवाओं के 50 प्रतिशत मामले उत्तरप्रदेश और बिहार के रहे।एएसपीए के अध्यक्ष नकुल पश्रिचा ने कहा कि कुल वैश्विक व्यापार में नकली उत्पादों की 3.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक स्तर पर कंपनियों के साथ ही सरकारों के लिये भी चुनौती बन गया है।

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