कोरोना वैक्सीन आने के बाद भी सैलरी पर महामारी की तबाही बनी रहेगी, अभी तो शुरुआत है: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के प्रमुख ने आगाह करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन आने के बाद भी वेतन और रोजगारों पर पड़ रहे दबाव बने रहेंगे।

Even after Corona vaccine, devastation of epidemic on salary wages will continue, it is just beginning -ILO
International Labor Organization 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के प्रमुख ने आगाह करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन आने के बाद भी, दुनिया भर में, लोगों के वेतन व रोजगारों पर पड़ रहे दबाव नहीं रुकेंगे। संगठन के महानिदेशक गाय रायडर ने बुधवार को यह चेतावनी ऐसे समय जारी की है जब महामारी के कारण दुनिया भर में वेतन और भत्तों में बढ़ोत्तरी को धीमा बना दिये जाने या उलट दिये जाने के बारे में एक अहम रिपोर्ट जारी हो रही है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला कामगार और कम वेतन पाने वाल, सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय रायडर ने वैश्विक वेतन रिपोर्ट के मुख्य बिन्दुओं की जानकारी देते हुए कहा कि फिर से उसी मुकाम पर लौटने के लिए रास्ता लम्बा होने वाला है, और मेरा ख्याल है कि ये रास्ता तूफान भरा होगा, और ये बहुत मुश्किल होने वाला है। संगठन की ये रिपोर्ट हर दो वर्ष में प्रकाशित की जाती है।

असाधारण झटका

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल चीन ऐसा देश है जो महामारी के प्रभावों से तेजी से उबर रहा है, उसके अलावा पूरे विश्व को महामारी की तबाही से उबरने, और उस जगह पहुंचने में काफी लम्बा समय लग सकता है, जहां वो महामारी शुरू होने से पहले थे। कोरोना वायरस महामारी ने रातों-रात कामकाजी दुनिया पर असाधारण तबाही मचा दी है।

श्रम संगठन के महानिदेशक गाय रायडर ने कहा कि ये तबाही काफी लम्बे समय तक नजर आएगी और हलचल व अनिश्चितता से भरपूर होगी। हमें वास्तविकता का सामना करना होगा, इस बात की बहुत ज्यादा सम्भावना है कि सरकारों द्वारा आर्थिक सहायता और वेतन सहायता में कमी आएगी, क्योंकि समय गुजरने के साथ वेतन प्रणालियों पर दबाव भी बढ़ेगा

दैनिक या साप्ताहिक वेतन हासिल करने वाले कामगारों को कोविड-19 के कारण, कम आमदनी होने की सम्भावना है। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया को कोरोना वायरस की तबाही शुरू होने के पहले के समय में लौटकर जाने की जरुरत नहीं है, और इसकी सम्भावना भी नहीं है।

क्रूर वास्तविकता

उनका कहना है कि मुझे कहना पड़ेगा कि महामारी ने, मौजूदा कामकाजी दुनिया की खामियों और ढांचागत कमजोरियों को, बहुत की क्रूर तरीके से सामने ला दिया है। और हम सभी को इस मौके का फायदा उठाना होगा, मैं जानता हूं कि महामारी की तबाही के दौर में, मौके का फायदा उठाने की बात करना कितना शर्मनाक है, मगर हमें इस नाज़ुक दौर में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के कुछ बुनियादी सिद्धान्तों का बारे में नए सिरे से सोचते हुए, आर्थिक पुनर्बहाली को बेहतर बनाने के बारे में सोचना होगा।

वैश्विक वेतन रिपोर्ट में दिखाया गया है कि महामारी ने किस तरह वेतनों पर बोझ डाल दिया है, और उच्च आय और निम्न आय वाले कामगारों के बीच वेतन की खाई और चौड़ी हो गई है, और इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और निम्न वेतन पाने वालों को भुगतना पड़ रहा है।

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