हो जाएं सावधान! 3 सालों में 42 फीसदी भारतीयों के साथ हुआ है फ्रॉड

पेमेंट और बैंकिंग के डिजिटलीकरण से आम लोगों के साथ- साथ सरकार को भी लाभ हुआ है। लेकिन इससे फाइनेंशल फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं।

Be careful as 42 percent of Indians in 3 years experienced Fraud
सावधान! 3 सालों में 42 फीसदी भारतीयों के साथ हुआ है फ्रॉड, सिर्फ 17 फीसदी को वापस मिला धन  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हमेशा है पेमेंट्स के लिए डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते आए हैं, क्योंकि इसके अनेक फायदे हैं। पेमेंट और बैंकिंग के डिजिटलीकरण से ग्राहकों को काफी आसानी होती है। लेकिन, आपके लिए सिर्फ इतना ही जानना जरूरी नहीं है। इसके फायदे के साथ- साथ नुकसान भी हैं। अगर आपने इनका सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया तो आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है, जिससे आपके बैंक अकाउंट से सारे पैसे भी उड़ सकते हैं।

सिर्फ 17 फीसदी लोगों को वापस मिला उनका धन
जी हां, पिछले तीन सालों में लगभग 42 फीसदी भारतीय वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। गुरुवार को एक नई रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षो में, बैंकिंग धोखाधड़ी के कारण अपना पैसा गंवाने वालों में से केवल 17 फीसदी ही अपना धन वापस पाने में सक्षम रहे, जबकि 74 फीसदी को कोई समाधान नहीं मिला।

परिवार के सदस्यों के साथ शेयर करते हैं अहम जानकारी
पहले के एक सर्वेक्षण में, लोकलसर्किल ने खुलासा किया कि 29 फीसदी नागरिक अपने एटीएम या डेबिट कार्ड पिन विवरण करीबी परिवार के सदस्यों के साथ साझा करते हैं, जबकि 4 फीसदी इसे अपने घरेलू और कार्यालय कर्मचारियों के साथ साझा करते हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 33 फीसदी नागरिक अपने बैंक खाते, डेबिट या क्रेडिट कार्ड और एटीएम पासवर्ड, आधार और पैन नंबर ईमेल या कंप्यूटर पर संग्रहीत करते हैं, जबकि 11 फीसदी नागरिकों ने इन विवरणों को अपने मोबाइल फोन संपर्क सूची में संग्रहीत किया है।

इन कारणों से होती है धोखाधड़ी
नए सर्वेक्षण से पता चला है कि बैंक खाता धोखाधड़ी, ई-कॉमर्स ऑपरेटरों द्वारा धोखाधड़ी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड धोखाधड़ी समस्या के प्रमुख कारण थे। फोन की संपर्क सूची, ईमेल या कंप्यूटर पर संवेदनशील वित्तीय विवरण संग्रहीत करना साइबर हमलों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है, खासकर अगर गैजेट चोरी हो जाता है या गलत हाथों में पड़ जाता है।

बैंकिंग पासवर्ड और एटीएम, बैंक खाते, ईमेल आदि के विवरण को स्टोर करने के लिए स्मार्टफोन की एक संपर्क सूची का उपयोग करना, ऐसी संवेदनशील जानकारी/क्रेडेंशियल्स को स्टोर करने का एक बहुत ही असुरक्षित तरीका है क्योंकि आजकल ऑनलाइन ऐप किसी के संपर्क और संदेशों तक पहुंचने की अनुमति मांगते हैं। सर्वेक्षण में भारत के 301 जिलों के नागरिकों से लगभग 32,000 प्रतिक्रियाएं शामिल थीं।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

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