टेलीकॉम सेक्टर में क्या रह जाएंगी सिर्फ दो कंपनियां? जानिए विश्लेषक की राय

बिजनेस
भाषा
Updated Feb 14, 2020 | 17:30 IST

Telecom companies In Telecom Sector: एजीआर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद क्षेत्र में दो ही कंपनियों के बने रह जाने की आशंका पहले से अधिक हो गयी हैं। एक विश्लेषक ने यह राय प्रकट की है।

 टेलीकॉम सेक्टर में क्या रह जाएंगी सिर्फ दो कंपनियां? जानिए विश्लेषक की राय
टेलीकॉम सेक्टर में क्या रह जाएंगी सिर्फ दो कंपनियां? जानिए विश्लेषक की राय  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के बकाये से संबंधित आदेश पर अमल नहीं होने को लेकर शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाने के बाद वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों के लिये स्थिति विशेष तौर पर कमजोर हो गयी है। इससे क्षेत्र में दो ही कंपनियों के बने रह जाने की आशंका पहले से अधिक हो गयी हैं। एक विश्लेषक ने यह राय प्रकट की है।

परामर्शदाता कंपनी कॉम फर्स्ट के निदेशक महेश उप्पल ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दूरसंचार उद्योग के लिये बुरी खबर है। इससे वोडाफोन आइडिया की स्थिति विशेष तौर पर कमजोर हुई है।उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में दो ही कंपनियों के बचे रह जाने का जोखिम पहले की तुलना में सबसे अधिक हो गया है।

अभी दूरसंचार क्षेत्र में सरकारी कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के अलावा तीन निजी कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जिओ हैं।उप्पल ने कहा कि कंपनियों के पास किसी उपाय की कम ही गुंजाइश बची है, लेकिन यदि सरकार इसे दीर्घकालिक समस्या माने तो वह नीति में बदलाव पर विचार कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार 

उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ 1.47 लाख करोड़ रूपए के समेकित सकल राजस्व (एजीआर) की अदायगी के न्यायिक आदेश पर अमल नहीं करने पर शुक्रवार को कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमनना कार्यवाही की जाये। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी की कि क्या इस देश में कोई कानून नहीं बचा है।

एजीआर पर कोर्ट का कड़ा रुख

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश पर अमल नहीं किये जाने पर कड़ा रूख अपनाया और दूरसंचार विभाग के डेस्क अधिकारी के एक आदेश पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस अधिकारी ने समेकित सकल राजस्व के मामले में न्यायालय के फैसले के प्रभाव पर रोक लगा दी थी।न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि डेस्क अधिकारी ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और अन्य सांविधानिक प्राधिकारियों को पत्र लिखा कि वे दूरसंचार कंपनियों और अन्य पर इस रकम के भुगतान के लिये दबाव नहीं डालें और यह सुनिश्चित करें कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो।

पीठ ने समेकित सकल राजस्व की बकाया राशि के भुगतान के लिये और समय देने का अनुरोध करने वाली वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इस घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि कोई डेस्क अधिकारी इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है कि जो शीर्ष अदालत के फैसले के प्रभाव पर रोक लगाता है।
 

 

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