मंदी का असर! मारुति सुजुकी में काम करने वाले 3000 टेम्परेरी कर्मचारी हुए बेरोजगार

ऑटो
Updated Aug 16, 2019 | 21:04 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

ऑटो सेक्टर में चल रही मंदी के कारण मारुति सुजुकी में काम करने वाले 3000 टेम्परेरी कर्मचारियों को नौकरी चली गई। मंदी के कारण उन लोगों के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू नहीं किया गया है।

Maruti Suzuki BCCL
मारुति सुजुकी के 3000 कर्मचारी हुए बेरोजगार  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • मारुति में काम करने वाले 3000 कर्मचारियों की नौकरी गई।
  • ऑटो सेक्टर में पिछले 9 महीने से मंदी चल रही है।
  • कम मांग के कारण टेम्परेरी कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किए गए।

नई दिल्ली: ऑटो इंडस्ट्री में चल रही मंदी का असर इस सेक्टर के रोजगार पर भी नजर आने लगा है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया में काम करने वाले 3000 टेम्परेरी कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। इस बात की जानकारी कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने दी है। कंपनी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा कि ऑटो सेक्टर में चल रहे स्लो डाउन के कारण टेम्परेरी कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू नहीं किया गया है, लेकिन परमानेंट कर्मचारियों की नौकरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। 

एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, 'ये व्यापार का हिस्सा है, जब मांज ज्यादा होती है ज्यादा कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्टर पर नियुक्त किया जाता है, जबकि मांग कम होने पर इन कर्मचारियों की संख्या घटाई जाती है।' भार्गव ने मौजूदा वक्त में चल रहे स्लो डाउन का मारुति पर प्रभाव के बारे में बोलते हुए ये जानकारी दी। 

उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी में काम करने वाले लगभग 3000 टेम्परेरी कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में स्लो डाउन, सेल, सेवा, वित्त आदि पर बोलते हुए भार्गव ने कहा, 'ऑटोमोबाइल की सेल में कम बिक्री का असर ज्यादा नौकरियों पर पड़ता है।'

गौरतलब है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर बीते दो दशक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, जिस कारण बहुत से लोगों पर नौकरी जाने का खतर बढ़ गया है। कम मांग के कारण सेक्टर में मंदी की वजह से कंपनियों को अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को बंद करना पड़ा है। कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले फेस्टिव सीजन में शायद कार की डिमांड बढ़े। पिछले 9 महीने के वाहनों की बिक्री में गिरावट का दौर जारी है। पिचले महीने वाहनों की बिक्री में 18.7 फीसदी की गिरावट आई है।

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